Wednesday, September 19, 2012

'जानवरों को कविता की जरूरत नहीं होती।' रामचंद्र शुक्ल

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के प्रसिद्ध निबंध 'कविता क्या है?' का अंतिम खंड.....

कविता की आवश्यकता

मनुष्य के लिए कविता इतनी प्रयोजनीय  वस्तु है कि संसार की सभ्य-असभ्य सभी जातियों में,किसी न किसी रूप में, पाई जाती है।  चाहे इतिहास न हो,विज्ञान न हो,दर्शन न हो,पर कविता  का प्रचार अवश्य  रहेगा।बात यह है कि मनुष्य अपने ही व्यापारों का ऐसा सघन और जटिल मंडल बाँधता  चला आ रहा  है जिसके भीतर बँधा-बँधा वह शेष सृष्टि के साथ अपने हृदय का संबंध भूला-सा  रहता है। इस परिस्थिति में मनुष्य को अपनी मनुष्यता खोने का डर  बराबर रहता है। इसी से अंतःप्रकृति में मनुष्यता  को समय-समय पर जगाते रहने के लिए कविता मनुष्य जाति के साथ लगी चली  आ रही है और चली रहेगी। जानवरों  को इसकी जरूरत नहीं।